आरती श्री गुरु महाराज
जय गुरुदेव दयालु, आरती करूँ गुरुवर की।
जय गुरुदेव दयालु, आरती करूँ गुरुवर की।
अज्ञान तिमिर हरण को, ज्योति जलाऊँ उर की॥
भव सागर से तारन, तुम ही पार लगाओ।
हम बालकों पर स्वामी, अपनी कृपा बरसाओ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुरु मूरत में ध्याऊँ।
चरण कमल की सेवा, निशिदिन मैं पाऊँ॥
जो जन गुरु की आरती, श्रद्धा से गावे।
सब सिद्धियां घर आवे, परम शान्ति पावे॥
अज्ञान तिमिर हरण को, ज्योति जलाऊँ उर की॥
भव सागर से तारन, तुम ही पार लगाओ।
हम बालकों पर स्वामी, अपनी कृपा बरसाओ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुरु मूरत में ध्याऊँ।
चरण कमल की सेवा, निशिदिन मैं पाऊँ॥
जो जन गुरु की आरती, श्रद्धा से गावे।
सब सिद्धियां घर आवे, परम शान्ति पावे॥