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50 aartis

Aarti Sangrah

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हनुमान · मंगलवार, शनिवार

आरती कीजै हनुमान लला की

आरती कीजै हनुमान लला की।

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काँपे, रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई, सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सीय सुधि लाये॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे, सीयारामजी के काज सँवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, लाय संजीवन प्रान उबारे॥

पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे॥
बायें भुजा असुरदल मारे, दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें, जय जय जय हनुमान उचारे॥
कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमान जी की आरती गावे, बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
लंक विध्वंस कीन्ह रघुराई, तुलसीदास प्रभु कीरति गाई॥

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिवरदूतं वातजातं नमामि॥