आरती श्री बगलामुखी
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरती करहूँ तुम्हारी।
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरती करहूँ तुम्हारी।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी॥
कर कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर नारी।
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
शत्रु स्तम्भन कारिणी माता, दुख दरिद्र सब दूर भगावे।
पीले फूल और पीली मिठाई, जो कोई तुमको श्रद्धा से चढ़ावे॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी॥
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी॥
कर कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर नारी।
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
शत्रु स्तम्भन कारिणी माता, दुख दरिद्र सब दूर भगावे।
पीले फूल और पीली मिठाई, जो कोई तुमको श्रद्धा से चढ़ावे॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी॥