आरती श्री अन्नपूर्णा
जय अन्नपूर्णा माता, मैया जय अन्नपूर्णा माता।
जय अन्नपूर्णा माता, मैया जय अन्नपूर्णा माता।
अन्न वस्त्र धन दायिनि, सुख सम्पत्ति दाता॥
जय अन्नपूर्णा माता॥
शिव भिक्षाटन कीन्हे, तुम से अन्न पायो।
जगत जननि तुम अम्बे, जग का ताप मिटायो॥
सोने का थाल कर में, भोजन भर लाती।
जो नर शरण में आता, भूख नहीं सताती॥
काशी की महारानी, विश्वनाथ प्यारी।
हम बालकों पर माता, करुणा करो भारी॥
अन्न वस्त्र धन दायिनि, सुख सम्पत्ति दाता॥
जय अन्नपूर्णा माता॥
शिव भिक्षाटन कीन्हे, तुम से अन्न पायो।
जगत जननि तुम अम्बे, जग का ताप मिटायो॥
सोने का थाल कर में, भोजन भर लाती।
जो नर शरण में आता, भूख नहीं सताती॥
काशी की महारानी, विश्वनाथ प्यारी।
हम बालकों पर माता, करुणा करो भारी॥