आरती श्री वैष्णो देवी
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
हाथ खड्ग त्रिशूल सोहे, कष्ट निवारण माता॥
जय वैष्णवी माता॥
ऊंचे पर्वत भवन विराजत, दर्शन से दुख भागा।
जो नर तुमको ध्यावत, सो नर बड़भागा॥
ब्रह्मा विष्णु महेश भी ध्यावत, मुनि जन करते सेवा।
सब देवों की रक्षा करती, जय जगदम्बे देवा॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल, माता की भेंट चढ़ावे।
हलवा पूरी चोला लाल, मैया को अति भावे॥
अन्धे को आंखें देती, कोढ़ी को काया।
बांझन को पुत्र देती, निर्धन को माया॥
चरण शरण में आये, सब की लाज रखो।
जो जन आरती गावे, सदा सुखी वो रहो॥
हाथ खड्ग त्रिशूल सोहे, कष्ट निवारण माता॥
जय वैष्णवी माता॥
ऊंचे पर्वत भवन विराजत, दर्शन से दुख भागा।
जो नर तुमको ध्यावत, सो नर बड़भागा॥
ब्रह्मा विष्णु महेश भी ध्यावत, मुनि जन करते सेवा।
सब देवों की रक्षा करती, जय जगदम्बे देवा॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल, माता की भेंट चढ़ावे।
हलवा पूरी चोला लाल, मैया को अति भावे॥
अन्धे को आंखें देती, कोढ़ी को काया।
बांझन को पुत्र देती, निर्धन को माया॥
चरण शरण में आये, सब की लाज रखो।
जो जन आरती गावे, सदा सुखी वो रहो॥