जय दत्तात्रेय देवा
जय योगीश्वर दत्त दयालु, तुम हो दीन अनाथ के पालू।
जय योगीश्वर दत्त दयालु, तुम हो दीन अनाथ के पालू।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव रूप, धारण कीन्हें अति अनूप॥
अत्रि महर्षि के तुम लाल, अनुसूया के हृदय विशाल।
स्मरण करते ही आ जाते, भक्तजनों के कष्ट मिटाते॥
गले में रुद्राक्ष की माला, हाथ में कमण्डल मृगछाला।
चारों वेद तुम्हारे मुख में, शांति मिलती तुम्हारे रुख में॥
तीन सिर और छह हैं हाथ, तुम हो सारे जग के नाथ।
जो गावे दत्तात्रेय की आरती, तापर कृपा करें श्री दत्त मूरति॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव रूप, धारण कीन्हें अति अनूप॥
अत्रि महर्षि के तुम लाल, अनुसूया के हृदय विशाल।
स्मरण करते ही आ जाते, भक्तजनों के कष्ट मिटाते॥
गले में रुद्राक्ष की माला, हाथ में कमण्डल मृगछाला।
चारों वेद तुम्हारे मुख में, शांति मिलती तुम्हारे रुख में॥
तीन सिर और छह हैं हाथ, तुम हो सारे जग के नाथ।
जो गावे दत्तात्रेय की आरती, तापर कृपा करें श्री दत्त मूरति॥